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दस महा विद्या (supreme intelligence)

दस महाविद्या(supreme intelligence) मित्रो मुझे काफी दिन से इनबॉक्स में दस महाविद्या  से सम्बंधित प्रशन मिल रहे है । तो मैं आप सब को दस महाविद्या के बारे में बताना चाहूंगा। इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे दस महाविद्या के सम्बंध में । दस महा विद्या क्या है ?क्या है उनका अस्तित्व? देवी के किन रूपो को दस महाविद्या कहा जाता है?। और क्या है उनके रहस्य? इन सब बातों को हम अलग अलग पोस्ट में चर्चा करेंगे। किसी भी समस्या  के समाधान के लिए संपर्क करे आनन्द हो ज्योतिष केंद्र  व्हाट्स एप्प   0091-7009688414   फोन               0091- 7009688414   दस महाविद्या (supreme intelligence)           जैसे कि हम नाम से ही जान सकते है कि दस महाविद्या का अर्थ है वह विद्याएं जो सभी विद्याओ से महान हो। भगवती दुर्गा का दूसरा नाम शक्ति है और शक्ति के बारे में तो हम सभी जानते हैं ऊर्जा , शक्ति यही हमारे अस्तित्व का कारण है चाहे वह प्राण ऊर्जा हो शारीरिक  शक्ति हो मानसिक शक्ति हो सब ऊर्जा और शक्...

माँ बगलामुखी साधना

                   माँ बगलामुखी साधना मां बगलामुखी जी आठवी महाविद्या हैं। यह स्तम्भन की देवी हैं. जिनके कार्य क्षेत्र में वार्तालाप -वाद-विवाद आदि अधिक आती हो जैसे अधिवक्ता ,प्रतियोगी परीक्षाओं के इच्छुक लोग ,शास्त्रार्थ ,प्रवचन ,ज्योतिष ,सेल्स  आदि से सम्बंधित लोग ,बार-बार रोगादि से परेशान हो ,असाध्य और लंबी बीमारी से पीड़ित हो ,आय के स्रोतों में उतार-चढ़ाव से परेशान हो , उन्हें बगलामुखी देवी की साधना -आराधना-पूजा करनी चाहिए । हल्दी रंग के जल से इनका प्रकट होना बताया जाता है। इसलिए, हल्दी का रंग पीला होने से इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहते हैं। इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। इनके भैरव महाकाल हैं।  अर्थात इनकी साधना में  सफलता पाने के लिए प्रथम शिव की कृपा प्राप्त अवश्य करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र की साधना इस साधना से पहले अत्यंत फलदायी है। या फिर ॐ नमः शिवाय का पाठ भी किया जा सकता है।                जो लोग शत्रु-विरोधी अधिका...

मारण तन्त्र के प्रयोग(1)

मारण तन्त्र के प्रयोग (1)       जैसे कि मारण तन्त्र   के बारे में पहले भी हमने कुछ बाते लिखी। इसके सदुपयोग और दुरुपयोग के बारे में आपको थोड़ा सा पहले भी बताया गया। इस का कुछ विस्तार इस पोस्ट में भी किया जाएगा । मित्रो मारण तन्त्र ऐसी क्रिया है जिसका निर्माण आपके अंदर के बुरे विचारों ,बुरे ख्यालो ,स्वप्नों और  बाहर के शत्रु रूपी समस्याओं को खत्म करने के लिए किया गया। बाहर के शत्रु रूपी से हमारा अर्थ है ग्रहों की समस्याएं , रास्ते की रुकावट, किया हुआ तन्त्र ,या फिर अन्याय रूपी शत्रुता। यह हम यह बताना चाहेंगे कि शत्रुता एक विचार है और शत्रु मारण का अर्थ उस व्यक्ति का मारण बिल्कुल नही है परंतु उस शत्रु रूपी विचार का मारण है। किसी भी समस्या  के समाधान के लिए संपर्क करे आनन्द हो ज्योतिष केंद्र  व्हाट्स एप्प   0091-7696568265    फोन               0091- 7009688414       मारन तन्त्र में जो इष्ट पूजा की जाती है वह है भगवान महाकाल , भगवती दुर्गा का महिषमर्दिनी रूप, म...